तुमसे मिलकर ही तो मैंने जाना है ,
चाहतों का सिलसिला शायद बहुत पुराना है
खुली आँखों से तेरा ख्वाब देखना ,
ये कैसा अफसाना है ?
उम्मीद नहीं तेरे साथ निभाने की ,
पर तमन्ना-ए-दिल तेरा साथ पाना है
कोई दूसरा अर्थ नहीं इस बात का ,
इसका मतलब तेरा दूर जाकर भी मेरे पास आना है
न चाहू तुझे कैद करना अपनी चाहत में ,
तू जिधर भी देखे बस तेरा ही जमाना है .
मेरा अंदाज़े इश्क़ न समझा कोई ,
हर किसी को बदले में कुछ तो ले ही जाना है .
कुछ बातें ले गए , कुछ वादे ले गए
मुझे तो तेरी यादों से बना महल सजाना है
जीतने का हौसला रखते हैं हम भी ,
पर तेरी ख़ुशी के आगे सब हार जाना है.
शब्द कम नहीं पड़ते लिखते - लिखते ,
ऐ समझने वाले अब और क्या समझाना है .......!
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मेरी रचना मेरी कल्पना |
5 comments:
Beautiful..
Thank you so much...
अत्युत्तम
शुक्रिया ज़ी
Behatreeen lovely ❤️❤️❤️❤️
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