Meri Diary


  मेरी डायरी
 
 
         पलटे जो पन्ने अपनी डायरी के, 
         इस बात से रूबरू हुई .. ....... ।। 

डूबो लो भले कलम कई रंगीन स्याही में, 
लिखावट के लिए एक स्याही जरूरी हुई... ।। 
 
पहले पृष्ठ पर सुंदर चित्रकारी ,
अंतिम पृष्ठ शायरी के........... 

दोनों ही सुखद बस मध्य में, 
उलझनों की स्याही बिखरी हुई..... । । 

बहुत भाग अभी खाली है डायरी में, 
अब कल्पना की नहीं, अनुभव की लेखनी मेरी हुई।। 

 पलटे जो पन्ने अपनी डायरी के, 
  इस बात से रूबरू हुई .. ....... ।। 


Safar ( Journey)


कौन जाने ये सफर कितना है..... 
ना ख्वाहिशें , ना उम्मीद का बिखरना है
इसमें हरदम खुशी से चलना है

कौन जाने ये सफर कितना है..... 
ना आंखों में दिलकश सूरत तेरी ,ना शौक अमीरी रखना है
इसमें  हर पल तेरी मोहब्बत में जीना है

कौन जाने ये सफर कितना है...... 
ना तुझे , ना तेरी चाहत को जीतना है
 इसमें हर दिन बेखौफ तेरी यादों में रहना है

कौन जाने ये सफर कितना है.... 
ना तेरे पास आना ,ना तुझसे दूर जाना है
 इसमें हर शाम का गीत तेरे साथ गुनगुनाना है

कौन जाने ये सफर कितना है.... 
ना अपना ,न पराया कह लाना है
इसमें तेरी प्यारी यादों के साथ गुजर जाना है

                                                -Maira


 

शहर की रानाईयां

 जगमगाते शहर के रानाईयों में, क्या न था  ढूंढने निकला था जिसको मैं, वही चेहरा न था ।।  मिलते चले लोग कई, राह में क्या न था  ढूंढने निकला था ...