Ek naya anubhav ( New Experience)

 एक नया अनुभव


मैंने चिड़ियाँ से कहा,

"मैं तुम पर कविता लिखना चाहती हूँ."......

चिड़ियाँ ने  मुझसे पूछा.... 
तुम्हारे शब्दों मे, मेरे परों की रंगिनी है? 
मैंने कहा... "नहीं "। 

तुम्हारे शब्दों में ,मेरे कंठ का संगीत है? 
 मैंने कहा......"नहीं"।। 

तुम्हारे शब्दों में, मेरे डैनों की उड़ान है? 
मैंने कहा......"नहीं"।। 
"जान है?"
"नहीं".... ।। 

तब तुम मुझ पर ,कविता क्या लिखोगी....? 
मैंने कहा ....."पर तुमसे मुझे प्यार है"।। 
चिड़िया बोली. ..प्यार का, शब्दों से क्या सरोकार है? 
 

                         एक नया अनुभव हुआ...... 

                           मैं मौन हो गयी....।। 

 













 


शहर की रानाईयां

 जगमगाते शहर के रानाईयों में, क्या न था  ढूंढने निकला था जिसको मैं, वही चेहरा न था ।।  मिलते चले लोग कई, राह में क्या न था  ढूंढने निकला था ...