दोनो ही सवाल
बाहर झाँकू या अंदर खुद के
अंधेरा नापू या रोशनी खुद की
देखू तुझे या देखू खुद को
मानू तुझे पूरा या अधूरा खुद को
बादलों से ढका तू या पाऊ खुद को
तू या कि मैं.. दोनो ही सवाल हैं।।@maira
सोच की कोई दिशा नहीं पर समझ की सुन्दर काया है Soch ki koi disha nahi pr samjh ki sundar kaya hai.
बाहर झाँकू या अंदर खुद के
अंधेरा नापू या रोशनी खुद की
देखू तुझे या देखू खुद को
मानू तुझे पूरा या अधूरा खुद को
बादलों से ढका तू या पाऊ खुद को
तू या कि मैं.. दोनो ही सवाल हैं।।@maira
जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है
संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रक्खा है
उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी
नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रक्खा है
आप गैरों की बात करते हैं
आज दुनिया बड़ी बावरी
पत्थर पूजने जाय
घर की चक्की कोई ना पूजे,
जिसका पिसा खाय।
पत्थरो आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो
मैं ने तुम को भी कभी अपना ख़ुदा रक्खा है
अब मेरे दीद की दुनिया भी तमाशाई है
तू ने क्या मुझ को मोहब्बत में बना रक्खा है
पी जा अय्याम की तल्ख़ी को भी हँस कर 'नासिर'
ग़म को सहने में भी क़ुदरत ने मज़ा रक्खा है @नासिर
जगमगाते शहर के रानाईयों में, क्या न था ढूंढने निकला था जिसको मैं, वही चेहरा न था ।। मिलते चले लोग कई, राह में क्या न था ढूंढने निकला था ...