Monday, March 21, 2022

World poetry day

 


मैं बंदिशो से आज़ाद करूँ,
बेनाम सी आवाज़ को । 


लफ़्ज़ों के परवाज लगाकर, 
कह दूँ हर अरमान को। 

सर्द हवाओ मे आफताब सी, 
कहती हर मौसम की बेबसी । 


विरह मे सुकूं , हूँ  देती

प्रेम की कहती अभिलाषा भी।। 


"मेरी रचना, मेरी कल्पना "   - @maira 


❤❤World Poetry Day ❤❤









Thursday, March 17, 2022

इस सोच में (Is soch mein)

 

इस सोच में बैठा हूँ , क्या ग़म उसे पंहुचा है

बिखरी हुयी जुल्फें हैं, उतरा हुआ चेहरा है

इस सोच में बैठा हूँ...

 

मुड़कर भी नही देखा, झोंके की तरह उसने

वो मेरे बराबर से, हँसता हुआ गुजरा है

बिखरी हुयी जुल्फें हैं, उतरा हुआ चेहरा है

इस सोच में बैठा हूँ...

 

इस सोच में बैठा हूँ , क्या ग़म उसे पंहुचा है

बिखरी हुयी जुल्फें हैं, उतरा हुआ चेहरा है

इस सोच में बैठा हूँ... @Chandandas 💜❤





Tuesday, March 15, 2022

खुशबू की तरह khushabu ki tarah

खुशबू की तरह



ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में 

माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में 

हम चाँद सितारों की राहों के मुसाफ़िर हैं 

हम रात चमकते हैं तारीक ख़लाओं में 

भगवान ही भेजेंगे चावल से भरी थाली 

मज़लूम परिंदों की मासूम सभाओं में 

दादा बड़े भोले थे सब से यही कहते थे 

कुछ ज़हर भी होता है अंग्रेज़ी दवाओं में #chandandas