मैं बंदिशो से आज़ाद करूँ,
बेनाम सी आवाज़ को ।
लफ़्ज़ों के परवाज लगाकर,
कह दूँ हर अरमान को।
सर्द हवाओ मे आफताब सी,
कहती हर मौसम की बेबसी ।
विरह मे सुकूं , हूँ देती
प्रेम की कहती अभिलाषा भी।।
सोच की कोई दिशा नहीं पर समझ की सुन्दर काया है Soch ki koi disha nahi pr samjh ki sundar kaya hai.
मैं बंदिशो से आज़ाद करूँ,
बेनाम सी आवाज़ को ।
लफ़्ज़ों के परवाज लगाकर,
कह दूँ हर अरमान को।
सर्द हवाओ मे आफताब सी,
कहती हर मौसम की बेबसी ।
विरह मे सुकूं , हूँ देती
प्रेम की कहती अभिलाषा भी।।
इस सोच में बैठा हूँ , क्या ग़म उसे पंहुचा है
बिखरी हुयी जुल्फें हैं, उतरा हुआ चेहरा है
इस सोच में बैठा हूँ...
मुड़कर भी नही देखा, झोंके की तरह उसने
वो मेरे बराबर से, हँसता हुआ गुजरा है
बिखरी हुयी जुल्फें हैं, उतरा हुआ चेहरा है
इस सोच में बैठा हूँ...
इस सोच में बैठा हूँ , क्या ग़म उसे पंहुचा है
बिखरी हुयी जुल्फें हैं, उतरा हुआ चेहरा है
इस सोच में बैठा हूँ... @Chandandas 💜❤
खुशबू की तरह
ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
हम चाँद सितारों की राहों के मुसाफ़िर हैं
हम रात चमकते हैं तारीक ख़लाओं में
भगवान ही भेजेंगे चावल से भरी थाली
मज़लूम परिंदों की मासूम सभाओं में
दादा बड़े भोले थे सब से यही कहते थे
कुछ ज़हर भी होता है अंग्रेज़ी दवाओं में #chandandas
जगमगाते शहर के रानाईयों में, क्या न था ढूंढने निकला था जिसको मैं, वही चेहरा न था ।। मिलते चले लोग कई, राह में क्या न था ढूंढने निकला था ...