Sunday, April 12, 2026

एक खामोश नज़र

हम क्या बन पाए हैं ?

वो प्रलय करती नदी,
या दूर हो चुके हिस्सों को
जोड़ता हुआ पुल?

कभी लगता है,
हमारे शब्दों में बाढ़ सी आ जाती है,
जो बहा ले जाती है
सारी समझ, सारे वचन…
और पीछे छोड़ जाती है
बस टूटे हुए किनारे।

और कभी—
तेरी एक खामोश नज़र
पुल बन जाती है,
जो मेरे बिखरे हिस्सों को
धीरे-धीरे जोड़ने लगती है।

शायद हम दोनों ही हैं—
नदी भी, और पुल भी,
कभी एक-दूसरे को डुबोते हुए,
तो कभी उसी गहराई पर
रास्ता बनाते हुए।

पर सच ये है—
रिश्ता तब ही बचता है,
जब प्रलय से ज्यादा
पुल बनने की इच्छा हो…| @maira






Friday, April 10, 2026

गुंजाइश


चीज़ें “use and throw” के बाद

कभी न कभी recycle हो जाती हैं,

पर ये जीवन है—

यहाँ ऐसी कोई गुंजाइश नहीं होती।


यहाँ हर इस्तेमाल

एक निशान छोड़ जाता है,

हर टूटन

वैसी ही रहती है…

जुड़ भी जाए तो

पहले जैसी नहीं होती।


हम भी तो कई बार

रिश्तों को वस्तुओं सा समझ लेते हैं,

थोड़ा इस्तेमाल, थोड़ा उपेक्षा,

और फिर छोड़ देना आसान लगता है।


पर जीवन…

किसी फैक्ट्री की तरह नहीं,

जहाँ गलती पिघलाकर

नई शक्ल दे दी जाए—


यहाँ जो खोता है,

वो अक्सर लौटकर नहीं आता,

और जो टूटता है,

उसकी आवाज़

लंबे समय तक सुनाई देती रहती है।


तो शायद सीख यही है—

संभालकर जीना,

संभालकर रखना,

क्योंकि ये जीवन है…

यहाँ “recycle” नहीं,

सिर्फ़ “real” होता है। @maira