हम क्या बन पाए हैं ?
वो प्रलय करती नदी,
या दूर हो चुके हिस्सों को
जोड़ता हुआ पुल?
कभी लगता है,
हमारे शब्दों में बाढ़ सी आ जाती है,
जो बहा ले जाती है
सारी समझ, सारे वचन…
और पीछे छोड़ जाती है
बस टूटे हुए किनारे।
और कभी—
तेरी एक खामोश नज़र
पुल बन जाती है,
जो मेरे बिखरे हिस्सों को
धीरे-धीरे जोड़ने लगती है।
शायद हम दोनों ही हैं—
नदी भी, और पुल भी,
कभी एक-दूसरे को डुबोते हुए,
तो कभी उसी गहराई पर
रास्ता बनाते हुए।
पर सच ये है—
रिश्ता तब ही बचता है,
जब प्रलय से ज्यादा
पुल बनने की इच्छा हो…| @maira
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