Friday, April 17, 2026

एक कहानी

सोचती हूँ

एक कहानी लिखूँगी अपने जीवन पर,

हर मोड़, हर ठहराव को

शब्दों में सजा दूँगी…


पर अगले ही पल

एक सवाल आकर ठहर जाता है—

सफलता का किस्सा

क्या कहूँगी उसमें?


क्या लिखूँगी उन रातों के बारे में,

जो बिना किसी शोर के

अंदर ही अंदर टूटती रहीं?

या उन ख्वाबों का जिक्र करूँ

जो अधूरे रहकर भी

मुझमें ज़िंदा हैं कहीं?


कहानी अगर लिखी,

तो सच लिखना होगा—

कि जीत से पहले

कितनी बार हारी हूँ मैं,

और मुस्कुराने से पहले

कितनी बार खुद को समेटा है।


शायद सफलता

किसी एक मुकाम का नाम नहीं,

बल्कि उन तमाम कोशिशों का सिलसिला है

जो किसी ने देखी ही नहीं…


हर कहानी में

सफलता का हिस्सा भले ही न हो,

लेकिन कोशिशों का ज़िक्र

नायिका की हिम्मत दिखाता है।


तो हाँ,

अब जब भी कहानी लिखूँगी,

उसमें जीत कम होगी,

और हिम्मत ज़्यादा—

क्योंकि वही असली किस्सा है

मेरे जीवन का।      @maira




1 comment:

Anonymous said...

♥️♥️👌