Friday, September 26, 2025

क्षमता

अधिक बुद्धि प्रायः कष्ट देती है, 

गहरी भावनाएँ जीवन को संक्षिप्त करती हैं। 

परंतु आगे एक खुला रास्ता है,

हर मोड़ पर अवसर हैं। 


फिर भी तुम्हारी दृष्टि इसे देख नहीं पाती,

जीवन में हालात; या तो अच्छे या फिर बुरे होते हैं।  

भांति - भांति के लोग व विचार होते हैं, 

परंतु वे किसी का दर्जा तय नहीं करते।


सत्य यही है -   

जब तक तुम दयालु हो, चाहे तुम्हारी शारीरिक क्षमताएँ सीमित हो,

तब भी तुम बदलाव ला सकते हो, जीवन जगत में उजियारा कर सकते हो।  

-@maira


Thursday, September 4, 2025

विरह की व्यथा

 मैं स्पष्ट नहीं हूँ —

तुम्हें पाने या खोने के विषय में,

बस इतना जानती हूँ,

कि सुख की वह धूप

मेरी देहरी पर कभी नहीं उतरी।


दुख की परछाइयों में

सदा निकट रही हूँ,

विरह की व्यथा का

हर दिवस वरण किया है।


स्वयं को तैयार करती रही

उस महाविप्लव के लिए,

जिसकी भावनाओं की बाढ़ में

एक दिन बह जाऊँगी।


कब होगी वह घड़ी —

मैं नहीं जानती,

पर इतना निश्चित है

कि तुम्हारे समीप

अपने अस्तित्व को

कभी नहीं देख पाई।


तुम्हारे जाने के उपरांत

स्वप्नों के आँगन में

तुम्हें फिर पा लूँगी,

जहाँ तुम सदा

मेरे संग चलोगे।


रात्रि की प्रतीक्षा करूंगी प्रतिदिन 

उन मधुर स्वप्नों के लिए,

जो मेरे हृदय में

साहस के दीपक जलाएंगे।


मैं स्पष्ट हूँ केवल इतना —

हममें कोई समानता नहीं,

मैं सदा रही, तुम्हारी पसंद से परे।


हमारा मिलन —

सृष्टि के लिए एक रहस्य है,

पर बिछड़ना —

भाग्य का उद्घोष।


कुछ भी नया नहीं है

हमारे संबंध में,

सब वही है

जैसा औरों के जीवन में होता है।


और आज भी

मैं स्पष्ट नहीं हूँ —

कैसे सहूँगी

इस बिरहा की अग्नि

जो मन के हर कोने को

धीरे-धीरे भस्म करती है।

-@Maira