Friday, April 10, 2026

गुंजाइश


चीज़ें “use and throw” के बाद

कभी न कभी recycle हो जाती हैं,

पर ये जीवन है—

यहाँ ऐसी कोई गुंजाइश नहीं होती।


यहाँ हर इस्तेमाल

एक निशान छोड़ जाता है,

हर टूटन

वैसी ही रहती है…

जुड़ भी जाए तो

पहले जैसी नहीं होती।


हम भी तो कई बार

रिश्तों को वस्तुओं सा समझ लेते हैं,

थोड़ा इस्तेमाल, थोड़ा उपेक्षा,

और फिर छोड़ देना आसान लगता है।


पर जीवन…

किसी फैक्ट्री की तरह नहीं,

जहाँ गलती पिघलाकर

नई शक्ल दे दी जाए—


यहाँ जो खोता है,

वो अक्सर लौटकर नहीं आता,

और जो टूटता है,

उसकी आवाज़

लंबे समय तक सुनाई देती रहती है।


तो शायद सीख यही है—

संभालकर जीना,

संभालकर रखना,

क्योंकि ये जीवन है…

यहाँ “recycle” नहीं,

सिर्फ़ “real” होता है। @maira





2 comments:

Anonymous said...

Nice

Anonymous said...

nice