Sunday, January 14, 2024

कुछ दिन तो बसो

 कुछ दिन तो बसो मिरी आँखों में

फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या

कोई रंग तो दो मिरे चेहरे को
फिर ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या

जब हम ही न महके फिर साहब
तुम बाद-ए-सबा कहलाओ तो क्या

इक आइना था सो टूट गया
अब ख़ुद से अगर शरमाओ तो क्या

तुम आस बंधाने वाले थे
अब तुम भी हमें ठुकराओ तो क्या

दुनिया भी वही और तुम भी वही
फिर तुम से आस लगाओ तो क्या

मैं तन्हा था मैं तन्हा हूँ
तुम आओ तो क्या न आओ तो क्या

जब देखने वाला कोई नहीं
बुझ जाओ तो क्या गहनाओ तो क्या

अब वहम है ये दुनिया इस में
कुछ खोओ तो क्या और पाओ तो क्या

है यूँ भी ज़ियाँ और यूँ भी ज़ियाँ
जी जाओ तो क्या मर जाओ तो क्या

@Gulam ali Sahab


Saturday, September 23, 2023

फज़ा (Fazaa)

 

फज़ा 





फज़ा भी है जवाँ, जवाँ
हवा भी है रवाँ, रवाँ
सुना रहा है ये समा
सुनी सुनी सी दास्ताँ
पुकारते हैं दूर से, वो काफिले बहार के
बिखर गये हैं रंग से, किसी के इंतजार के
लहर लहर के होंठ पर, वफ़ा की है कहानियाँ
सुना रहा है ये समा...
बुझी मगर बुझी नहीं, न जाने कैसी प्यास है
करार दिल से आज भी, ना दूर है ना पास है
ये खेल धूप-छाँव का, ये कुरबतें, ये दूरियाँ
सुना रहा है ये समा...
हर एक पल को ढूंढता, हर एक पल चला गया
हर एक पल फिराक का, हर एक पल विसाल का
हर एक पल गुजर गया, बना के दिल पे इक निशाँ
सुना रहा है ये समा...








Sunday, March 19, 2023

चौदहवीं की रात Chaudavi ki raat


-@Insha 

कल चौदहवीं की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी
कुछ ने कहा ये चाँद है
कुछ ने कहा, चेहरा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी

हम भी वहीं, मौजूद थे
हम से भी सब पुछा किए
हम हँस दिए, हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी...

इस शहर में किस से मिलें
हम से तो छूटी महफिलें
हर शख्स तेरा नाम ले
हर शख्स दीवाना तेरा
कल चौदहवीं की रात थी...

कूचे को तेरे छोड़ कर
जोगी ही बन जाएँ मगर
जंगल तेरे, पर्वत तेरे
बस्ती तेरी, सेहरा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी...

बेदर्द सुन्नी हो तो चल
कहता है क्या अच्छी ग़ज़ल
आशिक तेरा, रुसवा तेरा
शायर तेरा, इंशा तेरा||😍
कल चौदहवीं की रात थी...

Tuesday, December 6, 2022

दोनो ही सवाल(Dono hi sawal)

 दोनो ही सवाल



बाहर झाँकू या अंदर खुद के
अंधेरा नापू या रोशनी खुद की
देखू तुझे या देखू खुद को
मानू तुझे पूरा या अधूरा खुद को
बादलों से ढका तू या पाऊ खुद को
तू या कि मैं.. दोनो ही सवाल हैं।।@maira



Sunday, December 4, 2022

दुनिया बड़ी बावरी(Duniya badi Bawari)

जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है

संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रक्खा है

उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी

नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रक्खा है

आप गैरों की बात करते हैं
आज दुनिया बड़ी बावरी

पत्थर पूजने जाय

घर की चक्की कोई ना पूजे, 
जिसका पिसा खाय। 


पत्थरो आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो

मैं ने तुम को भी कभी अपना ख़ुदा रक्खा है

अब मेरे दीद की दुनिया भी तमाशाई है

तू ने क्या मुझ को मोहब्बत में बना रक्खा है

पी जा अय्याम की तल्ख़ी को भी हँस कर 'नासिर'

ग़म को सहने में भी क़ुदरत ने मज़ा रक्खा है  @नासिर








Sunday, November 20, 2022

दोस्त बन बन के मिले (Dost Ban Ban Ke Mile)

 




दोस्त बन बन के मिले

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले
मैने देखे हैं कई रंग बदलने वाले

तुमने चुप रहके सितम और भी ढाया मुझपर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसने वाले

मैं तो इखलाक़ के हाथों ही बिका करता हूँ
और होंगे तेरे बाज़ार में बिकने वाले

अखिरी दौर पे सलाम-ए-दिल-ए-मुस्तर लेलो 
फिर ना लौटेंगे शब-ए-हिज्र पे रोनेवाले...@Jagjit Singh (singer) 



Monday, November 14, 2022

कौन आयेगा यहाँ (Kon Ayega yaha)

                  कौन आयेगा यहाँ,


कौन आयेगा यहाँ, कोई न आया होगा

मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा। 

 

दिल-ए-नादां न धड़क, ऐ दिल-ए-नादां न धड़क

कोई खत ले के पड़ोसी के घर आया होगा। 

 

गुल से लिपटी तितली को गिराकर देखो,

आँधियों तुमने दरख़्तों को गिराया होगा। 

 

'कैफ़' परदेस में मत याद करो अपना मकां

अब के बारिश में उसे तोड़ गिराया होगा।  

                             -@Kaif Bhopali 




 

 


Friday, November 11, 2022

मुस्कुराने की बात (Muskurane ki baat)

        


मुस्कुराने कीबात



आशियानेकी बात करते हो

दिल जलाने की बात करते हो

सारी दुनिया के रंज-ओ-ग़म दे कर

मुस्कुराने की बात करते हो

हम को अपनी ख़बर नहीं यारो

तुम ज़माने की बात करते हो

ज़िक्र मेरा सुना तो चढ़ के कहा

किस दिवाने की बात करते हो

हादसा था गुज़र गया होगा

किस के जाने की बात करते हो

-By Jawed Qureshi