दोनो ही सवाल
बाहर झाँकू या अंदर खुद के
अंधेरा नापू या रोशनी खुद की
देखू तुझे या देखू खुद को
मानू तुझे पूरा या अधूरा खुद को
बादलों से ढका तू या पाऊ खुद को
तू या कि मैं.. दोनो ही सवाल हैं।।@maira
सोच की कोई दिशा नहीं पर समझ की सुन्दर काया है Soch ki koi disha nahi pr samjh ki sundar kaya hai.
बाहर झाँकू या अंदर खुद के
अंधेरा नापू या रोशनी खुद की
देखू तुझे या देखू खुद को
मानू तुझे पूरा या अधूरा खुद को
बादलों से ढका तू या पाऊ खुद को
तू या कि मैं.. दोनो ही सवाल हैं।।@maira
संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रक्खा है
उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी
नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रक्खा है
आप गैरों की बात करते हैं
आज दुनिया बड़ी बावरी
पत्थर पूजने जाय
घर की चक्की कोई ना पूजे,
जिसका पिसा खाय।
पत्थरो आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो
मैं ने तुम को भी कभी अपना ख़ुदा रक्खा है
अब मेरे दीद की दुनिया भी तमाशाई है
तू ने क्या मुझ को मोहब्बत में बना रक्खा है
पी जा अय्याम की तल्ख़ी को भी हँस कर 'नासिर'
ग़म को सहने में भी क़ुदरत ने मज़ा रक्खा है @नासिर
दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले मैने देखे हैं कई रंग बदलने वाले तुमने चुप रहके सितम और भी ढाया मुझपर तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसने वाले मैं तो इखलाक़ के हाथों ही बिका करता हूँ और होंगे तेरे बाज़ार में बिकने वाले अखिरी दौर पे सलाम-ए-दिल-ए-मुस्तर लेलो फिर ना लौटेंगे शब-ए-हिज्र पे रोनेवाले...@Jagjit Singh (singer)
कौन आयेगा यहाँ, कोई न आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा।
दिल-ए-नादां न धड़क, ऐ दिल-ए-नादां न धड़क
कोई खत ले के पड़ोसी के घर आया होगा।
गुल से लिपटी तितली को गिराकर देखो,
आँधियों तुमने दरख़्तों को गिराया होगा।
'कैफ़' परदेस में मत याद करो अपना मकां
अब के बारिश में उसे तोड़ गिराया होगा।
-@Kaif Bhopali
आशियानेकी बात करते हो
दिल जलाने की बात करते हो
सारी दुनिया के रंज-ओ-ग़म दे कर
मुस्कुराने की बात करते हो
हम को अपनी ख़बर नहीं यारो
तुम ज़माने की बात करते हो
ज़िक्र मेरा सुना तो चढ़ के कहा
किस दिवाने की बात करते हो
कि धूप छाँव का आलम रहा जुदाई न थी
अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, रंजिशें थीं बहुत
बिछड़ने वाले में सब कुछ था, बेवफ़ाई न थी
बिछड़ते वक़्त उन आँखों में थी हमारी ग़ज़ल
ग़ज़ल भी वो जो किसी को अभी सुनाई न थी