Tuesday, September 7, 2021

Dil hi dil mein (Silently)

 दिल ही दिल में 


दिल ही दिल में खत्म होकर , 
धड़कने रह जायेंगी...... 
वो न आयेंगे तो मिट कर चाहते रह जायेंगी।। 


सब जुदा हो जायेंगे एक मोड आ जाने के बाद 
ख्वाब आँखो से छीनेंगे , सूरते रह जायेंगी .... 
वो न आयेंगे तो मिट कर चाहते रह जायेंगी।। 


वो चले जायेंगे मेरी मंज़िलो से भी परे, 
मेरे सन्नाटे मे उनकी आहटे रह जायेंगी.... 
दिल ही दिल मे खत्म होकर धड़कने रह जायेंगी।। 


कुछ उदासी और मिल जायेगी मिल कर आपसे 
सामना हो जायेगा, पर हसरते रह जायेंगी..... 
वो न आयेंगे तो मिट कर चाहते रह जायेंगी।। 


हम चरागे अंजुमन् बन कर सुलगते जायेंगे, 
याद कुछ बीते दिनों की महफिले रह जायेंगी.... 
दिल ही दिल मे खत्म होकर धड़कने रह जायेंगी।। 

                                                                -@chandan das





Saturday, September 4, 2021

Tera chehra (your face)

 तेरा चेहरा 



       कभी आँसू , कभी खुशबु ;
कभी नग़मा बनकर 
                               हमसे हर शाम मिलती है........ 
                      तेरा चेहरा बनकर.... ।। 

                    दिल के काग़ज़ पर तू उतरता है  
शेरों की तरह..... 
                              मेरे होंठो पर तू चमकता है 
                      नग़मा बनकर....।। 

                    मेरा क्या हाल है; आके कभी देख तो ले.... 
                                       जी रही हूँ, तेरा भूला हुआ वादा बनकर।। 

          हमसे हर शाम मिलती है ....
                        तेरा चेहरा बनकर......।।  






Thursday, September 2, 2021

Hasrat (desire)


हसरत


वक़्त की गोद में छुपी बैठी है ;
उसे पाने की हसरत मेरी........ 

अजीब इत्तेफाक है.... 
वो भुलाये नहीं भूलता, 
उसे ' मैं ' याद भी नहीं .....। 

गर पा भी लूँ उसे, 
एक रोज मैं......; 
ये मुकम्मल - ए - हसरत तो नहीं.....। 

अक्सर नजदीकियां हैं , 
इश्क़ का रवैय्या बदल देतीं.....।। -@maira


                         -उसे पाने की हसरत-


Tuesday, August 31, 2021

Yakeen (Believe)

                                     यकीन 




यकीं करूँ या नहीं,
 जो मैं थी, वो अब नहीं
                    क्यू सोचती हूँ तुम्हें हर-पल
                    क्यू याद करती हूँ वो कल 
जिसमें तुमने कहा था... 
गम हो या खुशी, बाँट लेंगे हम आधा - आधा । 
अब आगे ये रिश्ता निभाऊँ कैसे...... 
तुम बिछड़ ना जाओे कहीं, 
इस डर से अटकती हैं साँसे........ 
                        तुम्हे पाकर खोने से तो अच्छा है 
तुम्हारी तलाश मे निकलू ,पर 
                         तुम्हे ना पाऊँ मैं.....।। 
मुहब्बत है तुमसे बहुत 
                          ये किस तरह बताऊँ मैं......? 
सोचा था ,दो कदम साथ चलेंगे हम..... 
पर शायद ये खयाल पूरा होगा , 
अब अगले जनम......... । 
                            माफ करना छोड़ रही हूँ... 
      यहीं ..... ये सफर।। 
                           लेकिन हमेशा तुम्हारे ही नाम होंगे 
      मेरे आठों पहर......।। 
यकीं हुआ है अब .... 
जो मैं थी, रह गई बस वही 
       रह गई बस वही...............-@maira


यकीं करूँ या नहीं -@maira



Saturday, August 28, 2021

Uljhan (confusion)

 उलझन 


बहुत पहले जब याद आते थे, मुझे 
गणित के सूत्र सारे 
ज्यामिति जब अच्छे से आती थी मुझे 
जब शायद सारे रिश्तों की परिधि 
दूरी और उनकी नजदीकियां
अच्छे से निकाल सकती थी मैं
कौन से रिश्ते को कहाँ और किस 
कोण पर रखना है, मुझे 
तब शायद बेहतर समझ सकती थी मैं 
पर उस वक़्त तुमने मुझे 
सिर्फ किताबो मे उलझाए रखा 
न मैंने कोई रिश्ता जोड़ा, ना घटाया उनको
और ना ही कोई सूत्र लगाया उनमें 
आज जब सालों बाद ,मैं सारे सूत्र 
सारी ज्यामिति भूलती जा रही हूँ
तुमने रखकर सारे रिश्ते मेरे सामने 
मुझे रिश्तों के गणित मे उलझा दिया है...........




ये इख़्तियार्.....







 

Kalpna nahi haqiqat hai ( Not fiction, its reality)

            


कल्पना नहीं, हकीकत है

 

वो दो लफ़्ज़ों की बात, तुमसे कह जाना 
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
कह कर वो बाते, सुकूँ आ जाना 
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
ज़िक्र तुम्हारा और तम्हे सोचना
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
दूर रह कर भी, तुम्हारा पास होना
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
तमन्ना तुमसे बात करने की, एक वक़्त तम्हे देख पाना
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
सिवा खुशी के तुम्हारे, और कुछ न चाहना
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
 
यूँ आँखों से तुम्हारे लिए प्यार का छलक जाना
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
यादों का तुम्हारी रह रह कर आना 
कल्पना नहीं ,हकीकत है। 
साथ तुम्हारे, मेरा खुश रहना
कल्पना नहीं, हकीकत है। 
इस तरह मेरा, तुम्हारा मिलना 
कल्पना नहीं, हकीकत है।। 

                                        -@maira
कल्पना नहीं, हकीकत है. . . . 



             


Monday, September 7, 2020

Ek naya anubhav ( New Experience)

 एक नया अनुभव


मैंने चिड़ियाँ से कहा,

"मैं तुम पर कविता लिखना चाहती हूँ."......

चिड़ियाँ ने  मुझसे पूछा.... 
तुम्हारे शब्दों मे, मेरे परों की रंगिनी है? 
मैंने कहा... "नहीं "। 

तुम्हारे शब्दों में ,मेरे कंठ का संगीत है? 
 मैंने कहा......"नहीं"।। 

तुम्हारे शब्दों में, मेरे डैनों की उड़ान है? 
मैंने कहा......"नहीं"।। 
"जान है?"
"नहीं".... ।। 

तब तुम मुझ पर ,कविता क्या लिखोगी....? 
मैंने कहा ....."पर तुमसे मुझे प्यार है"।। 
चिड़िया बोली. ..प्यार का, शब्दों से क्या सरोकार है? 
 

                         एक नया अनुभव हुआ...... 

                           मैं मौन हो गयी....।। 

 













 


Thursday, August 27, 2020

काग़ज़ और स्याही ( paper and ink)

 

काग़ज़ और स्याही 

 

यूँ इतरा के एक दिन स्याही, 
कोरे काग़ज़ से है पूछती..... 

बोलो..! लफ्ज़ बन कर 
किस रंग मे उतरूँ आज? 

मुस्कुराता काग़ज़ बोला ..... 
तुम मेरी शोभा, मेरी पहचान, मेरा गुरूर हो 
हर रंग में, हर दिन मुझे मंजूर हो...।। 

मैं नही कहता..... 
है इतिहास गवाह, तेरे- मेरे साथ का। 
रिश्ता हमारा मोहताज़ नहीं .... 
किसी रंग, रूप और आकार का.....।। 


 







 

Saturday, July 25, 2020

Meri Diary


  मेरी डायरी
 
 
         पलटे जो पन्ने अपनी डायरी के, 
         इस बात से रूबरू हुई .. ....... ।। 

डूबो लो भले कलम कई रंगीन स्याही में, 
लिखावट के लिए एक स्याही जरूरी हुई... ।। 
 
पहले पृष्ठ पर सुंदर चित्रकारी ,
अंतिम पृष्ठ शायरी के........... 

दोनों ही सुखद बस मध्य में, 
उलझनों की स्याही बिखरी हुई..... । । 

बहुत भाग अभी खाली है डायरी में, 
अब कल्पना की नहीं, अनुभव की लेखनी मेरी हुई।। 

 पलटे जो पन्ने अपनी डायरी के, 
  इस बात से रूबरू हुई .. ....... ।। 


Friday, July 24, 2020

Safar ( Journey)


कौन जाने ये सफर कितना है..... 
ना ख्वाहिशें , ना उम्मीद का बिखरना है
इसमें हरदम खुशी से चलना है

कौन जाने ये सफर कितना है..... 
ना आंखों में दिलकश सूरत तेरी ,ना शौक अमीरी रखना है
इसमें  हर पल तेरी मोहब्बत में जीना है

कौन जाने ये सफर कितना है...... 
ना तुझे , ना तेरी चाहत को जीतना है
 इसमें हर दिन बेखौफ तेरी यादों में रहना है

कौन जाने ये सफर कितना है.... 
ना तेरे पास आना ,ना तुझसे दूर जाना है
 इसमें हर शाम का गीत तेरे साथ गुनगुनाना है

कौन जाने ये सफर कितना है.... 
ना अपना ,न पराया कह लाना है
इसमें तेरी प्यारी यादों के साथ गुजर जाना है

                                                -Maira